रेल मंडल की महिला कर्मचारियों को 730 की जगह 365 दिन यानी एक साल की ही चाइल्ड केयर लीव मिलेगी। इस अवधि के बाद जो भी महिला कर्मी चाइल्ड केयर लीव को आगे बढ़ाएंगी उनका प्रतिमाह के हिसाब से 20 फीसदी वेतन काटा जाएगा। जबकि अब तक वेतन काटने जैसा कोई नियम नहीं था। इस मामले में रेल अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय रेलवे बोर्ड का है, इसलिए इसके बारे में कुछ नहीं कह सकते। देश के विभिन्न रेल मंडलों में महिला रेलकर्मियों द्वारा चाइल्ड केयर लीव का सही तरीके से उपयोग न करने की शिकायतों के बाद रेलवे बोर्ड ने इसकी अवधि अब आधी कर दी है। इस आदेश पर अमल भी शुरू कर दिया गया है।
भोपाल रेल मंडल में हैं 2360 महिला कर्मचारी
इस निर्णय से पश्चिम-मध्य रेलवे के भोपाल, जबलपुर व कोटा मंडलों की 6 हजार से ज्यादा महिला रेलकर्मी प्रभावित होंगी। इसमें भोपाल रेल मंडल की 2360 महिला रेलकर्मी भी शामिल हैं। रेलवे यूनियनों ने इस निर्णय पर विरोध जताते हुए ज्ञापन भेजे हैं, लेकिन बोर्ड अधिकारियों का तर्क है कि लीव का दुरुपयोग न हो, इसलिए ऐसा किया गया है।
ऐसी शिकायतों के कारण कटौती
रश्मि सिंह भोपाल रेल मंडल के मैकेनिकल विभाग में पदस्थ हैं। उन्होंने संयुक्त परिवार में रहने के बाद भी लड़की की हायर सेकंडरी की परीक्षा की तैयारी के लिए पिछले साल चाइल्ड केयर लीव ली थी। इस बात की जानकारी उनकी लीव खत्म होने से कुछ दिनों पहले ही रेल प्रशासन को लगी। इसके बाद उनसे कहा गया कि वे आगे से ऐसा न करें। इसी तरह आशा राय की पदस्थापना रेल मंडल के इंजीनियरिंग विभाग में है। उन्होंने बिना किसी सूचना के अपने लड़के का वास्ता देकर चाइल्ड केयर लीव ले ली, जिसकी जानकारी 6 महीने बाद दी। इस कारण रेल प्रशासन ने उन्हें कारण बताओ नोटिस देते हुए आगे से ऐसा न करने की हिदायत दी।
23 हजार पश्चिम मध्य रेलवे में कर्मचारी
सितंबर के बाद लागू: बोर्ड के नए आदेश के मुताबिक महिला रेलकर्मी अपने 18 साल तक के बच्चों की परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा आदि की तैयारी के लिए चाइल्ड केयर लीव लेती हैं, जिसकी अवधि अब 365 दिन कर दी गई है। जबकि सितंबर 2018 से पहले 730 दिन की चाइल्ड केयर लीव महिलाकर्मियों को मिलती थी।
इधर, मातृत्व अवकाश बढ़ाया और चाइल्ड केयर लीव घटाई
केंद्र सरकार ने एक तरफ मातृत्व अवकाश को 12 से बढ़ाकर 26 हफ्ते कर दिया है। इसका आशय यह है कि 84 दिनों की जगह 182 दिन का अवकाश दिया है। दूसरी ओर रेलवे में कार्यरत महिला कर्मियों की चाइल्ड केयर लीव को घटा दिया गया है। इस तरह महिलाओं के मामले में दो अलग-अलग तरह के निर्णय देकर उनकी परेशानी और बढ़ाई दी गई है।